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बगलामुखी देवी

                                                                         बगलामुखी देवी

दस महाविधाओं में देवी बगलामुखी का आठवां स्थान है। धर्म शास्त्रों से पता चलता है कि इनके सभी वस्त्र , आभूषण , फूल , प्रसाद आदि का चढ़ावा तक पीला ही होता है। देवी बगलामुखी को ब्रम्हास्त्र के नाम से भी जाना जाता है। माता बगलामुखी का मंदिर पंडोह डैम के किनारे बाखली गांव में है। मंदिर पहले डैम था, परन्तु मंदिर के डूब जाने के कारण इसे नज़दीक के गांव में निर्मित किया गया। यहाँ पर भी माता ऐतिहासिक एवं रहस्यमयी परिस्थितियों में प्रकट हुई थी। माता शिवरात्रि के दिनों में ‘ नरोल ‘ देवी के रूप में आमंत्रित की जाती है और नरोल में ही उसकी पूजा अर्चना की जाती है। यह देवी दिनांक 15.02.2015 को अपने मूल स्थान से शिवरात्रि में भाग लेने के लिए मण्डी शहर में महाजन खानदान के किसी व्यक्ति द्वारा बुलाने पर उनके घर में आयेंगी और दिनांक 16.02.2015 को श्री माधोराय जी के पास अपनी हाजरी भरेगी।