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देव कमरुनाग

                                                                            देव कमरुनाग

कमरुनाग देव का मंदिर चच्योट तहसील के कमराह नामक स्थान पर घने जंगल से घिरी पहाड़ी पर है। इस पहाड़ी पर सुन्दर झील तथा झील के किनारे पर कमरूनाग का भव्य मंदिर है। शिखर शैली में निर्मित मंदिर के साथ 2 – 3 सराएँ भी हैं। श्रद्धालु कमरूनाग को मन्नत या चढ़ावे की अमूल्य वस्तुएं झील में भेंट करते हैं। जब कभी मण्डी रियासत में आपत्तिकाल या सूखा के काले बादल छा जाते थे तो मण्डी के राजा कमरूनाग की पूजा का विशेष प्रबंध करता था और संकट के बादल तुरंत हट जाते थे। मण्डी शिवरात्रि में यही अकेले एकमात्र देवता हैं जो कभी स्वयं नहीं आते इनकी केवल ” छड़ी ” आती है। देव कमरुनाग को मुख्य आगंतुक देवता के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह देवता मण्डी में श्री माधोराय से मिलनी करने के पश्चात सीधे माँ श्यामाकाली टारना को प्रस्थान करता है और पूरी शिवरात्रि के दौरान वहीँ रहता है।  यह देवता दिनांक 11. 02. 2015 को अपने मूल स्थान से शिवरात्रि के लिए प्रस्थान करेगा व उस दिन शाम को चैलचौक में रहेगा उसके बाद दूसरे दिन जगह – जगह रुकने का स्थान जैसे बग्गी, नलसर, घट्टा, गागल होते हुए गुटकर और दिनांक 16.02.2015 को मण्डी शिवरात्रि के लिए माधोराय जी के पास 2 – 3 बजे दोपहर को हाजरी भरेंगे।